
OUR LEGACY
Trusted Across Generations
A timeless tradition of Vedic wisdom, serving millions with authentic Panchang and Kundali since the very beginning.
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Kundalis Prepared with precision

विरासत
काशी में १८५७ में गणेश आपा पञ्चाङ्ग परंपरा की शुरुआत हुई। पांच पीढ़ियों से ज़्यादा समय से, हमारे परिवार ने वैदिक खगोलीय गणना की कला को संजोया और आगे बढ़ाया है, और पूरे भारत में हज़ारों परिवारों की सेवा की है।
सन् १८५७ — परम्परा की स्थापना I पण्डित गणेश आपा (आपाजी)I
काशी की प्राचीन ज्योतिष परम्पराओं से प्रेरित होकर पण्डित गणेश आपा ने सन् १८५७ में गणेश आपा पञ्चाङ्ग की नींव रखी। यह केवल एक पञ्चाङ्ग नहीं, बल्कि विश्वास, शास्त्रीय ज्ञान और सांस्कृतिक मार्गदर्शन की परम्परा का प्रारम्भ था.
सन् १९१६ — परम्परा के संवाहक I पण्डित बालकृष्ण शास्त्री म्हसकर
पण्डित बालकृष्ण शास्त्री म्हसकर ने पञ्चाङ्ग निर्माण की शास्त्रीय परम्पराओं को और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ बनाया। उनके नेतृत्व में गणना-पद्धतियों की शुद्धता और ज्योतिष प्रामाणिकता को सर्वोच्च महत्व मिला।

पञ्चाङ्ग और हिंदी पञ्चाङ्ग
हमारी विशिष्टता
उन्नीसवीं शताब्दी से संरक्षित परम्परा, शास्त्रीय गणनाएँ और पीढ़ियों का विश्वास।
पाँच पीढ़ियों से संरक्षित ज्ञान, शास्त्रोक्त परम्पराएँ और परिशुद्ध गणनाएँ ही गणेश आपा पञ्चाङ्ग की विशिष्ट पहचान हैं। यही मूल्य आज भी हमारी प्रत्येक सेवा और प्रकाशन का आधार हैं।

१८५७ से विरासत
सन् १८५७ से गणेश आपा पञ्चाङ्ग वैदिक ज्योतिष, पञ्चाङ्ग निर्माण एवं धार्मिक मार्गदर्शन की परम्परा को निरन्तर आगे बढ़ाता आ रहा है। यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि पीढ़ियों से संजोई गई एक जीवित विरासत है।

पाँच पीढ़ियों का अनुभव
पाँच पीढ़ियों से संचित शास्त्रीय ज्ञान, अनुभव और समर्पण ने गणेश आपा पञ्चाङ्ग को विश्वास एवं प्रामाणिकता का पर्याय बनाया है। प्रत्येक पीढ़ी ने इस परम्परा को और अधिक समृद्ध एवं सुदृढ़ किया है।

सूर्य सिद्धान्त आधारित गणनाएँ
हमारी पञ्चाङ्ग एवं कुण्डली गणनाएँ प्राचीन भारतीय खगोलीय ग्रन्थ ‘सूर्य सिद्धान्त’ के सिद्धान्तों पर आधारित हैं, जिससे शास्त्रोक्त, परिशुद्ध एवं विश्वसनीय परिणाम सुनिश्चित होते हैं।

ज्ञान एवं मार्गदर्शन
कुण्डली, पञ्चाङ्ग, पर्व-उत्सव, व्रत एवं सनातन परम्पराओं से जुड़े विषयों का महत्व, उनका आध्यात्मिक पक्ष तथा उन्हें मनाने की शास्त्रोक्त विधियाँ।
लक्ष्मी पूजन
लक्ष्मी पूजन धन, समृद्धि और शुभता की प्राप्ति का पावन अनुष्ठान है। जानिए इसका महत्व, शुभ मुहूर्त, पूजन-विधि और इसके आध्यात्मिक संदेश को।
जन्मकुण्डली : जीवन एवं आत्मबोध का दर्पण
जन्मकुण्डली व्यक्ति के स्वभाव, संभावनाओं और जीवन-पथ को समझने का वैदिक माध्यम है। जानिए आधुनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता और ज्योतिषीय महत्व को।

दीपावली
दीपावली अन्धकार पर प्रकाश, अधर्म पर धर्म और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। जानिए इसके आध्यात्मिक महत्व, परम्पराओं और उत्सवों के क्रम के बारे में।

ॐ
सम्पर्क करें
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गणेश आपा पञ्चाङ्ग — काशी की १७०+ वर्ष पुरानी वैदिक परम्परा। पाँच पीढ़ियों से हम ज्योतिष, पञ्चाङ्ग एवं कुण्डली निर्माण की सेवा में समर्पित हैं। आपके प्रश्नों, परामर्श अथवा मार्गदर्शन हेतु हमसे सम्पर्क करें।
कार्यालय समय
सोमवार - शनिवार
10:00 AM - 4:00 PM
१८५७ से
विश्वास की परम्परा
पाँच पीढ़ियों से वैदिक ज्योतिष, पञ्चाङ्ग निर्माण, कुण्डली निर्माण एवं धार्मिक मार्गदर्शन की सेवा में समर्पित।





